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योगी सरकार के तीन साल, ऐसा रहा कार्यकाल
March 19, 2020 • Rashtra Times

एक नेता जो बनारस के मंदिर में पूजा करके इंतजार कर रहा था, एक फोन काल का औऱ साथ ही एक चार्टर प्लेन का भी ताकि वो उसमें सवार होकर जाए और देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बन जाए। एक नेता जो पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष था और उसको लगता था कि उसकी दावेदारी पर वैधानिकता की मुहर लगने की तो महज औपचारिकता ही शेष है। एक अन्य नेता जो अपने चार-पांच समर्थकों के साथ एयरपोर्ट से निकलकर कदम तो सरकारी गेस्ट हाउस की ओर बढ़ाता है लेकिन उसे ये भान था कि पिछले दो दावेदार हैं वो भले ही हल्ला मचा रहे हो और ताजपोशी के लिए सूट भी सिलवा रहे हो लेकिन उत्तर प्रदेश की गद्दी तो उन्हें मिलनी तय है। ये कहानी है उत्तर प्रदेश के तीन दिग्गज नेता मनोज सिन्हा, केशव प्रसाद मोर्य और योगी आदित्यनाथ की। ये कहानी है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी की। यूपी में नरेंद्र मोदी के नाम पर सवार बीजेपी की पतवार ने पूरे दम-खम से जीत सुनिश्चित की और 312 सीटें जीती। बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद गाजीपुर से सांसद रहे मनोज सिन्हा का नाम अचानक से सुर्खियों में आ गया और उनकी बायोग्राफी भी मीडिया में तैयार होने लगी साथ ही समीकरण भी पेश किए जाने लगे। मनोज सिन्हा दिल्ली से काशी विश्वनाथ के दर्शन करने पहुंचे और वहीं चार्टेड प्लेन का इंतजार करने लगे। दिल्ली में मौजूद केशव मौर्या के चेहरे की मुस्कान इस वक्त और खिलखिला उठी जब लखनऊ के एयरपोर्ट पर नारे लगे 'पूरा यूपी डोला था, केशव-केशव बोला था'। लेकिन तमाम तैरते नामों के बीच योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को यूपी की बागडोर संभाली। यूपी में योगी आदित्यनाथ के सीएम बने तीन बरस पूरे हो गए हैं। योगी यूपी में बीजेपी के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए जिन्होंने तीन साल का कार्यकाल पूरा किया है। आदित्यनाथ से पहले बीजेपी के कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह और राम प्रकाश गुप्ता भी यूपी के सीएम रह चुके हैं। कल्याण सिंह पहली बार जून 1991 में प्रदेश के सीएम बने थे और 6 दिसंबर 1992 तक वे इस पद पर रहे। दूसरी बार वह 21 सितंबर 1997 से नवंबर 1999 तक के लिए सीएम बने। इनके अलावा, राम प्रकाश गुप्ता नवंबर 1999 से अक्टूबर 2000 तक यूपी के सीएम रहे। वहीं, राजनाथ सिंह का कार्यकाल अक्टूबर 2000 से शुरू होकर मार्च 2002 तक चला। लेकिन योगी ने तीन साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया।

इन तीन सालों में योगी ने बहुत तेजी से कड़े और बड़े फैसले लिए हैं। रस्मअदागी समझे जाने वाले घोषणापत्र यानी बीजेपी के संकल्प पत्र को सार्थक बनाने के लिए उन्होंने ताबड़तोड़ फैसले लिए। आज योगी सरकार के ऐसे कई फैसलों को हमने समेटा है जो बीते 3 सालों में यूपी में बड़े बदलाव का कारण बने। 
जब जीवन में अपने लिए पाने का भाव खत्म हो जाता है, दूसरों के लिए काम करने का भाव जन्म लेता है। तब एक इंसान बनता है योगी। ऐसा ही एक योगी यूपी का मुख्यमंत्री बना तो उसके हर कदम एक बड़े बदलाव की नींव रख रहा है। योगी उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का संकल्प लेकर उतरे। उत्तम प्रदेश यानी ऐसा प्रदेश जहां कानून व्यवस्था टाइट हो, महिलाओं और लड़कियों के साथ सड़कें सुरक्षित हों। रोजगार हो। 3 सालों में योगी ने बहुत कुछ ऐसा किया है जिससे उत्तम प्रदेश की नींव पड़ती दिखती है। 
अखिलेश यादव से विरासत में इसी व्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ ने 2017 में राज्य की बागडोर संभाली। फिर क्या था सुबह-सुबह ही फिल्मी स्टाइल में पुलिस के काम का जायजा लेने हजरतगंज थाने पहुंच गए। 
पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को यूपी में साकार करने की पहल- मुख्यमंत्री ने झाडू लगाकर प्रदेश में स्वच्छता अभियान की शुरुआत करने के बाद नगर निगम के अफसरों से पूछा कि आखिर लखनऊ शहर इतना गंदा क्यों है? उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि बरसात से पहले नालियों की सारी सिल्ट (जमी हुई गंदगी) निकाली जाए। स्वच्छ भारत मिशन के चलते बीमारियों से मौतों में कमी आई है। सरकार द्वारा बताए गए आंकड़ों के मुताबिक 2016 में मस्तिष्क ज्वर से 436 मरीजों की मौत हुई थी। 2018 में 1279 में से 125 मरीजों की मौत हुई। वहीं अब 2019 में मौतों की संख्या घटकर 22 रह गई है।
एडवांस लाइफ सपोर्ट सेवा- ईलाज में देरी से गंभीर मरीजों की जान न चली जाए इसके लिए योगी सरकार ने यूपी के सभी 75 जिलों में 150 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस सेवा शुरू की। 
 
गरीब मुस्लिम लड़कियों की शादी में मदद- सबका साथ, सबका विकास के नारे के साथ योगी सरकार ने सद्भावना मंडप नाम से योजना शुरू की। अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए हर जिले में सदभावना मंडम के जरिए गरीब मुस्लिम महिलाओं की शादी करवाई जाएगी। 
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दावा है कि उसकी सामूहिक विवाह योजना ने न सिर्फ सामाजिक सद्भाव को बढ़ाया है, बल्कि अब तक तकरीबन साढ़े तीन लाख गरीब दंपतियों को दहेज रूपी दानव से बचाया भी है। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार के अनुसार विवाह संस्कार में अनावश्यक प्रदर्शन एवं खर्च को रोकने के उद्देश्य से अक्टूबर, 2017 में सामूहिक विवाह योजना शुरू की थी। विवाह के लिए 35,000 रुपये अनुदान की व्यवस्था हुई। अब यह अनुदान बढ़ाकर 51,000 रुपये कर दिया गया है। गरीब परिवारों को भी सरकार द्वारा व्यक्तिगत तौर पर अनुदान दिया जा रहा है। सीएम के मीडिया सलाहकार ने बताया कि योगी सरकार अब तक 3 लाख 49 हजार 414 जोड़ों के विवाह पर 973.90 करोड़ रुपये अनुदान दे चुकी है। योजना के तहत अब तक 467.4049 करोड़ रुपये सरकार की तरफ से अनुदान दिया जा चुका है।
 
महापुरूषों के नाम पर छुट्टी की छुट्टी- सीएम योगी ने बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की 126वीं जयंती पर महापुरूषों के नाम पर छुट्टियों को निरस्त किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट बैठक में एक बड़ा फैसला लिया। अब उत्तर प्रदेश में महापुरुषों के जन्मदिन और पुण्यतिथि पर होने वाली सभी छुट्टियों को खत्म कर दी गयी।  
भू-माफियाओं की खैर नहीं- एंटी भूमाफिया वेबपोर्टल शुरू किया। इस पोर्टल के जरिए प्रदेश के लोग सरकारी और निजी संपत्तियों पर कब्जे की अॉनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। योगी सरकार ने भू-माफिया से जमीनों को मुक्त कराने के लिए हर जिले में एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स गठित करने का फैसला किया। एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स तहसील, जिला, मंडल और राज्य स्तर पर गठित।
 
बिजली- राज्य सरकार ने उप्र विद्युत नियामक आयोग की तैयार किए गए स्टैंडर्ड ऑफ  परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019 पर गजट नोटिफिकेशन कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश में मुआवजा क्लॉज प्रभावी हो गया है। यानी तय समयसीमा में समस्याओं का निस्तारण नहीं होने पर उपभोक्ता बिजली कंपनियों से मुआवजा पाने के हकदार हो जाएंगे। बिजली का बिल जमा करने वालों की संख्या बढ़ रही है। पिछली सरकारों में 80 हजार करोड़ का घाटा हुआ और कोई भी गांव  अब अंधेरे में नहीं है। 
बूचड़खानों पर चला चाबुक- योगी राज के शुरू होने के साथ ही यूपी में अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई शुरू हो गई। मीट कारोबारी हड़ताल पर भी गए। सीएम योगी से भी मिले। इस बीच, योगी सरकार ने साफ किया कि अवैध बूचड़खानों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार ने प्रदेश के सभी अवैध बूचड़खानों को बंद कराया।
एंटी रोमियो दस्ता- महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर मनचलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए योगी राज में हर जिले में एंटी रोमियो दस्ते बनाए। मनचलों के खिलाफ कई जिलों में लगातार कार्रवाई हुई। सीएम योगी ने इस कार्रवाई की सराहना की और कहा कि महिला सुरक्षा के साथ कोई भी नरमी नहीं की जाएगी।
गुंडो के खिलाफ फुल एक्शन- कट्टेबाजी और बमबाजी के लिए उत्तर प्रदेश एक अरसे से बदनाम रहा है। सरकार किसी की भी रही हो, तूती बंदूकबाजों की ही बोलती थी। लेकिन वक्त बदला और बदलते वक्त में यूपी में अपराधी कन्फ्यूज हो गए कि करें तो क्या करें। यूपी ने एक दौर ऐसा भी देखा कि एनकाउंटर का खौफ उनके सिर पर गिद्ध बनकर नाचने लगा। जो जेल में थे वो जेल से बाहर आना नहीं चाहते और जो बाहर हैं वो घर से बाहर निकलना नहीं चाहते थे। जो फरार थे वो जेल जाने को बेकरार हो गए। यूपी पुलिस नहीं तो किसी तरह आसपास की पुलिस से सेटिंग कर किसी तरह जेल भिजवा देने की जुगत में लग गए नहीं तो बाहर गोली न खानी पड़ जाए। 15 हजार के एक ईनामी बदमाश ने तो हापुड़ के थाने में जाकर खुद ही सरेंडर तक कर दिया था। 
नकल पर नकेल- बीते दिनों जब राज्य में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नकल को जायज ठहराते हुए थोड़ी बहुत नकल करने में कोई दिक्कत नहीं है जैसे बयान देते नजर आते थे। तो यूपी सरकार की नकल पर नकेल कसने के प्रयासों को लेकर सुर्खियां बटोर रही थी। उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा हो या सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ, दोनों ने परीक्षा में होती नकल पर लगाम कसने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। यहां तक कि नकल को लेकर एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया था जिन पर परीक्षा में हो रही नकल से जुड़ी किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। 
इसके अलावा अपने आप में एक अनूठी पहल करते हुए योगी सरकार ने आसपास में हो रहे शोर-शराबे से पढ़ाई में कई बार दिक्कत के निपटारे के लिए बकायदा विज्ञापन प्रकाशित कर छात्रों को अवगत भी कराया है कि अगर छात्र शोरगुल से परेशान हैं और पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पा रहे हैं तो 112 नंबर पर काल करें। जिसके बाद पुलिस उनकी समस्या का समाधान करेगी। 
 
रिकवरी पब्लिक प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश- राजधानी लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान संपत्तियों को क्षति पहुंचाने वाले लोगों से नुकसान की भरपाई के लिए लगाये गए उनके फोटो और पतायुक्त होर्डिंग व पोस्टर को हटाने के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई योगी आदित्यनाथ सरकार ने यह अहम फैसला किया है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने विरोध प्रदर्शनों, आंदोलनों, जुलूसों और धरने के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को क्षति पहुंचाने वाले लोगों से नुकसान की भरपाई के लिए अध्यादेश लाने का फैसला किया है। कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश, 2020 के ड्रॉफ्ट को मंजूरी दी गई।
दंगाइयों से रिकवरी के लिए क्लेम ट्रिब्यूनल- इसके लिए राज्य सरकार ने रिटायर्ड जिला जज की अध्यक्षता में अध्यादेश के जरिए क्लेम ट्रिब्यूनल बनाने के फैसला किया है। सबसे अहम बात ये कि इसके फैसले को किसी भी अन्य न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। इस ट्रिब्यूनल को आरोपी की संपत्ति को अटैच करने का अधिकार होगा तथा ट्रिब्यूनल अधिकारियों को आरोपी का नाम, पता और फोटोग्राफ प्रचार और प्रसार करने का आदेश भी दे सकेगा। ताकि आम लोग उसकी संपत्ति की खरीदारी न करें। 
योगी आदित्यनाथ अपने बयानों की वजह से भी खूब सुर्खियां में रहे
योगी आदित्यनाथ ने बजट सत्र के दौरान 19 फरवरी 2020 को सदन में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर लखनऊ में हुई हिंसा और उसमें मारे गए प्रदर्शनकारियों पर अपने ही अंदाज में विपक्ष पर हमला बोला। सीएम के इस बयान पर काफी हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा, "राजनेता अपनी बेटियों को उनके बीच भेजते हैं जो भारत के खिलाफ नारेबाजी करते हैं। यूपी में दंगा नहीं हुआ अगर कोई मरने के लिए आ ही रहा है वो जिंदा कैसे बचेगा? पुलिस की गोली से कोई नहीं मरा उपद्रवी अपने आप से मरे हैं।
इसके अलावा योगी आदित्यनाथ ने सीएए को लेकर हो रहे महिलाओं के धरना प्रदर्शन पर ऐसी टिप्पणी की थी जिसने मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक सुर्खियां बटोरी थीं। 22 जनवरी 2020 को सीएम योगी आदित्यनाथ ने कानपुर में CAA के समर्थन में आयोजित रैली में यह बयान दिया था। उनके इस बयान पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कड़ा एतराज जताया था। योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि पुरुष घरों में रजाई में सो रहे हैं और महिलाएं धरने पर बैठी हैं। महिलाएं कहती हैं कि पुरुष बोलते हैं कि अब हम अक्षम हो चुके हैं, आप धरने पर जाकर बैठो।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने 10 अप्रैल 2019 को लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मेरठ में एक चुनावी सभा में कहा था कि अगर कांग्रेस-बीएसपी-एसपी को 'अली' पर विश्वास है तो उन्हें भी बजरंगबली पर विश्वास है। योगी के इस बयान की भी बहुत चर्चा हुई थी और विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग तक इसकी शिकायत की थी।
लोकसभा चुनाव के दौरान 7 मई 2019 को दिल्ली की एक सीट पर चुनाव प्रचार करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीएम अरविंद केजरीवाल पर विवादित टिप्पणी की थी। योगी आदित्यनाथ ने कहा था, "सबसे बड़ा अजूबा दिल्ली के मुख्यमंत्री स्वयं हो गए हैं। पता ही नहीं लगता कि वे मुख्यमंत्री हैं या धरना मंत्री...क्या मुख्यमंत्री को धरने पर बैठना चाहिए। जब कोई सुधरता नहीं है, इसीलिए लोग उसे कहते हैं लतखोर।
बहरहाल, प्रदेश की योगी सरकार तीन वर्ष पूरा करने पर उपलब्धियों का बड़े स्तर पर बखान करेगी। इसके लिए प्रदेश, विधानसभा क्षेत्र व जिला स्तर पर उपलब्धियों की बुकलेट तैयार है। ये बुकलेट प्रदेश की उपलब्धियों को समेटते हुए जिला व विधानसभा क्षेत्र के लिहाज से तैयार हुई है। सभी बुकलेट के पहले हिस्से में राज्य स्तर पर केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं व परियोजनाओं की उपलब्धियों का ब्योरा है।