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ट्रैवल, टूरिज्म और एविएशन इंडस्ट्री से 6.5 करोड़ को मिलता है रोजगार, लॉकडाउन से 2.5 करोड़ नौकरियां जाने का खतरा
April 8, 2020 • Rashtra Times

नई दिल्ली. दुनियाभर में ट्रैवल, टूरिज्म और एविएशन इंडस्ट्री से करीब 6.2 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। लेकिन कोरोना वायरस के चलते जारी लॉकडाउन की वजह से वैश्विक स्तर पर करीब 2.5 करोड़ लोगों के बेरोजगार होने का खतरा बढ़ गया है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) की ओर से इस बाबत रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से एयर ट्रैवल डिमांड में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। वैश्विक स्तर पर एविएशन इंडस्ट्री अकेले 27 लाख लोगों को रोजगार देती है।

एविएशन सेक्टर के किस रीजन में कितनी नौकरियां
एशिया पैसिफिक - 11 लाख
यूरोप - 56 लाख
लैटिन अमेरिका - 29 लाख
नार्थ अमेरिका - 20 लाख
अफ्रीका - 20 लाख
मिडिल ईस्ट - 90 हजार


एयरलाइंस की कमाई में गिरावट
अगर पूरे साल की कमाई की बात करें, तो लॉकडाउन के चलते पिछले साल 2019 के मुकाबले इस साल 2020 में पैसेंजर रेवेन्यू 44 फीसदी गिर सकता है। ऐसे में साल 2020 में पैसेंजर रेवेन्यू में एयरलाइंस कंपनियों को 252 बिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है। एविएशन सेक्टर के लिए साल 2020 की दूसरी तिमाही काफी खराब हो सकती है। इस दौरान डिमांड में करीब 70 फीसदी की गिरावट दर्ज की जा सकती है।

सरकारी मदद की गुहार
कोरोना वायरस की वजह से दुनिया के ज्यादा देशों ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ाने रोक दी हैं। ऐसे में एविएशन इंडस्ट्री को रोजाना करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। इसलिए एविएशन इंडस्ट्री की तरफ से तत्काल प्रभाव से आर्थिक मदद की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक इस साल एविएशन इंडस्ट्री को रेवेन्यू में 250 बिलियन डॉलर (19,06,875 करोड़ रुपए) का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

21 दिन के लॉकडाउन से 75 से 80 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होने की आशंका
कोरोनावायरस से बचने के लिए केंद्र सरकार ने 21 दिनों का लॉकडाउन किया है। इससे देश में एविएशन सेक्टर को करीब 75 से 80 हजार करोड़ रुपए के नुकसान होने की आशंका है। दुनिया भर में एविशन सेक्टर को कुल 21 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। यह बात सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन इंडिया (CAPA) ने अपनी रिपोर्ट में कही है। देश की एयरलाइंस कंपनियों को अप्रैल-जून की तिमाही में सबसे ज्यादा कमाई होती है, लेकिन लॉकडाउन के चलते इस साल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। CAPA का कहना है कि 21 दिनों में हुए नुकसान के बाद एयरलाइंस इस हालात में नहीं होंगी कि वो 30 जून 2020 तक अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें दोबारा सही ढंग से शुरू कर सकें। एयरलाइंस कंपनियां नुकसान की वजह से वित्त वर्ष 2021 में फ्लीट के विस्तार, टिकट की कीमत समेत अपने पूरे बिजनेस मॉड्यूल को बदल सकती हैं।

एविएशन सेक्टर को रोजाना 150 करोड़ रुपए का नुकसान
कोरोना वायरस के चलते देश में एविएशन सेक्टर को रोजाना 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। देश में प्रतिदिन करीब 4000 घरेलू और 500 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन होता है। अकेले दिल्ली में ही रोजाना 900 से अधिक उड़ानों का संचालन होता है। भारतीय विमानन उद्योग को 75 से 80 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के नुकसान की आशंका है। इस वजह से रेवन्यू भी 40% गिर सकता है। डीजीसीए के एक अधिकारी का कहना है कि कोरोना संकट से पहले देश में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का एक दिन का रेवन्यृ करीब 350-400 करोड़ रुपए था, जो अब आधा रह गया है।

लॉकडाउन बढ़ा ताे कैश रिजर्व समाप्त होने पर बंद करना पड़ेगा ऑपरेशन
CAPA की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कोविंड 19 की वजह से शुरुआती तौर पर 21 दिनों का लॉकडाउन किया है। लेकिन इस लॉकडाउन के बढ़ने का अंदेशा जाहिर किया जा रहा है। अगर लॉकडाउन तीन माह तक जारी रहता है, तो दो लिस्टेड एयरलाइंस इंडिगो और स्पाइसजेट का वित्त वर्ष 2020 की चौथी और वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में साझा नुकसान करीब 1.25 से लेकर 1.50 बिलियन डॉलर होगा। ऐसे में इंडिगो का अन्य छोटी एयरलाइंस कैरियर का कैश रिजर्व खत्म हो सकता है और उन्हें अपना कामकाज हमेशा के लिए बंद करना पड़ सकता है।