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राहुल गांधी का हमला, पूछा- डिफाल्टर्स का नाम बताने से क्यों डर रही है मोदी सरकार
March 16, 2020 • Rashtra Times

नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को दावा किया कि जानबूझकर कर्ज की अदायगी नहीं करने वालों (विलफुल डिफाल्टर्स) को लेकर लोकसभा में पूरक प्रश्न पूछने नहीं दिया गया और बतौर सांसद उनके अधिकार की रक्षा नहीं की गई। गांधी ने यह सवाल भी किया कि आखिर सरकार देश के 50 सबसे बड़े विलफुल डिफाल्टर्स के नाम बताने से क्यों डर रही है? उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि यह सांसद का अधिकार है कि वह पूरक पूश्न पूछे। मैंने सवाल किया कि 50 विलफुल डिफाल्टर्स का नाम बताइए जिसका मंत्री ने जवाब नहीं दिया। मैं पूरक प्रश्न पूछना चाहता था। 

कांग्रेस नेता ने दावा किया, ‘‘यह लोकसभा अध्यक्ष का कर्तव्य था कि वह मेरे अधिकार की रक्षा करें और पूरक प्रश्न पूछने की इजाजत देते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। सवाल पूछने के मेरे अधिकार को छीनना पूरी तरह अनुचित है।’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘सरकार विलफुल डिफाल्टर्स के नाम लेने से क्यों डर रही है? 50 लोगों ने भारतीय पैसे की चोरी की है। हम जानते हैं कि अर्थव्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है। फिर इन लोगों के नाम क्यों नहीं बता रहे हैं?’’ गांधी ने कहा कि मैं लगातार आगाह करता आ रहा हूं कि कोरोना वायरस की स्थिति में अर्थव्यवस्था और बैंको की हालत बहुत खराब हो सकती है। दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि इस तरह के कदमों से कोई मदद नहीं मिलेगी।

 

 कांग्रेस सदस्यों का लोकसभा से वाकआउट

कांग्रेस सदस्यों ने आज लोकसभा में अपने नेता राहुल गांधी को दूसरा पूरक सवाल पूछने का मौका नहीं दिए जाने पर कड़ा प्रतिवाद जताते हुए सदन से वाकआउट किया। राहुल गांधी ने प्रश्नकाल के दौरान सवाल किया कि वर्तमान में जानबूझकर रिण नहीं चुकाने वाले शीर्ष 50 चूककर्ताओं का बैंक वार ब्यौरा क्या है तथा रिण के रूप में दी गई धनराशि और बट्टे खाते में डाली गई धनराशि कतनी है? राहुल गांधी के पूरक सवाल का वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने जवाब दिया जिस पर कुछ कांग्रेस सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि वित्त मंत्री को जवाब देना चाहिए था। इस पर अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि राज्य मंत्री अक्सर प्रश्नकाल में सदस्यों के सवालों का जवाब देते हैं। वित्त राज्य मंत्री द्वारा पूरक प्रश्न का जवाब दिए जाने के बाद अध्यक्ष ने राहुल गांधी को दूसरा पूरक प्रश्न पूछने को कहने के बजाय सीधे महत्वपूर्ण दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जो कि प्रश्नकाल की समाप्ति पर होती है।