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मुक्केबाज पंघाल ने खेल मंत्री से चयन प्रक्रिया बदलने की मांग की, कहा- खिलाड़ी को अवॉर्ड के लिए गिड़गिड़ाना न पड़े
May 15, 2020 • Rashtra Times

 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में सिल्वर जीतने वाले देश के पहले पुरुष मुक्केबाज अमित पंघाल ने खेल मंत्री किरिन रिजिजू से राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया में बदलाव की गुजारिश की है। इस संबंध में पंघाल ने उन्हें चिठ्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी खिलाड़ी को अवॉर्ड के लिए गिड़गिड़ाना न पड़े। 

पंघाल ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में सबसे पहले खिलाड़ी को खुद या नेशनल फेडरेशन, स्पोर्ट्स बोर्ड या पूर्व में पुरस्कार जीत चुके लोगों के जरिए नामांकन भेजना होता है। इसके बाद खेल मंत्रालय़ द्वारा चुना गया पैनल पॉइंट सिस्टम के आधार पर विजेताओं के नाम को फाइनल करता है। इसमें ओलिंपिक और वर्ल्ड चैम्पियनशिप में पदक को ज्यादा तरजीह दी जाती है।

मौजूदा चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं: पंघाल

उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। कई ऐसे उदाहरण हैं, जिसमें योग्य होने के बाद भी खिलाड़ियों को पुरस्कार हासिल करने के लिए कोर्ट जाना पड़ा। यह खिलाड़ी के साथ ही खेल प्रबंधन से जुड़े लोगों के लिए असहज होने वाली स्थिति है।  'सेल्फ नॉमिनेशन की प्रक्रिया तुरंत बंद हो'

इस मुक्केबाज ने चिठ्ठी में आगे लिखा कि दुनियाभर के ज्यादातर बड़े खेल पुरस्कार बिना नामांकन के दिए जाते हैं। खेल पुरस्कारों से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था अंग्रेजों के समय से चली आ रही है। ऐसे में बतौर खेल मंत्री आप अगर नामांकन की प्रक्रिया को खत्म कर देते हैं, तो भारत के खेल ढांचे में यह ठोस सुधार होगा। मेरा आपसे निवेदन है कि इस बदलाव को अमल में लाएं। मैं आपका कर्जदार रहूंगा। 

खेल मंत्रालय के पास हर खिलाड़ी की जानकारी होती है

सेना में सूबेदार पंघाल ने कहा कि खेल मंत्रालय और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास हर खिलाड़ी का डेटा होता है। उन्हें पता है कि कौन पुरस्कार के लिए योग्य है और कौन अयोग्य? उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इस साल अगर नहीं तो अगले साल ही सही। लेकिन खेल पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया में पूरी तरह बदलाव होना चाहिए। 

पंघाल का नाम 2 बार अर्जुन पुरस्कार के लिए भेजा गया 

बता दें कि एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाले इस मुक्केबाज का नाम दो बार अर्जुन अवॉर्ड के लिए भेजा गया है। लेकिन डोपिंग के उल्लंघन की वजह से उनके नाम पर कभी विचार नहीं किया गया। पंघाल को 2012 में चेचक हो गया था। इसके इलाज के दौरान उन्होंने ऐसी दवाओं का सेवन किया था, जो प्रतिबंधित हैं। 

इस बार पुरस्कार मिलने की उम्मीद: पंघाल

उन्होंने कहा कि सेना इस बार भी मेरा नाम अर्जुन पुरस्कारों के लिए भेजेगी। ऐसे में मुझे उम्मीद है कि डोपिंग के उल्लंघन का 8 साल पुराना मामला इसके आड़े नहीं आएगा। मैं लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा हूं। इसलिए मुझे लगता है कि मैं यह पुरस्कार पाने के लिए योग्य हूं। 

खेल मंत्रालय ने इस बार ऑनलाइन आवेदन मंगाए

इस साल के राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई। कोरोना की वजह से खेल मंत्रालय ने इस बार खिलाड़ियों से ऑनलाइन आवेदन मंगाए हैं। नाम भेजने की आखिरी तारीख तीन जून है।