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महिलाओं की नाभि देखकर पहचानें कि कैसी हैं वो, 10 रहस्य
January 31, 2020 • Rashtra Times

नाभि का आकार और संरचना सभी में अलग-अलग होती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों की नाभि के आसपास अधिक रोएं होते हैं। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार नाभि हमारी जीवन ऊर्जा का केंद्र है। योग, आयुर्वेद और ज्योतिष में नाभि के बारे में बहुत ही रहस्यमी बातों का जिक्र मिलता है। इसी तरह सामुद्रिक विज्ञान या सामुद्रिक शास्त्र में नाभि से किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व, रोग और भविष्य जाना जा सकता है। आओ संक्षिप्त में जानते हैं कि सामुद्रिक शास्त्र में महिलाओं की नाभि के बारे में क्या उल्लेख मिलता है।

समुद्र शास्त्र में नाभि के आकार-प्रकार के अनुसार स्‍त्री और पुरुष के व्यक्तित्व के बारे में उल्लेख मिलता है।


1. समतल नाभि : जिन महिलाओं की नाभि समतल होती है उन्हें जल्द गुस्सा आता है, लेकिन पुरुष की नाभि समतल है तो वह बुद्धिमान और स्पष्टवादी होगा।


2. गहरी नाभि : जिनकी नाभि गहरी होती है वे सौंदर्य प्रेमी, रोमांटिक और मिलनसार होते हैं। इन्हें जीवनसाथी सुंदर मिलता है।


3. लंबी नाभि : जिन महिलाओं की नाभि लंबी और वक्री होती है, वे आत्मविश्वास से भरी हुई और आत्मनिर्भर होती हैं।


4. गोल नाभि : जिनकी नाभि गोल होती है, वे आशावादी, बुद्धिमान और दयालु होती हैं। ऐसी महिलाओं का वैवाहिक जीवन सुखमय गुजरता है।'
5. उथली नाभि : उथली नाभि वाले लोग कमजोर और नकारात्मक होते हैं। ऐसे लोग अक्सर काम को अधूरा छोड़ देते हैं और वे स्वभाव से चिढ़चिढ़े भी होते हैं।

 

6. ऊपरी नाभि : जिन लोगों की नाभि ऊपर की ओर बड़ी और गहरी है, तो ऐसे लोग हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के होते हैं।
7. उभरी और बड़ी हुई नाभि : उभरी और बड़ी हुई नाभि है तो ऐसे लोग जिद्दी होते हैं।

 

8. अंडाकार नाभि : अंडाकार नाभि वाले लोग सोचने में अपना समय गंवाकर हाथ आया मौका छोड़ देते हैं।


9. चौड़ी नाभि : चौड़ी नाभि वाले लोग शक करने वाले और अंतरमुखी होते हैं।

 

10. बंटी हुई नाभि : जिन लोगों की नाभि ऊपर से नीचे आती हुई 2 भागों में बंटी हुई दिखाई दे तो ऐसे लोग आर्थिक, पारिवारिक और सेहत की दृष्टि से मजबूत होते हैं।

नोट : उपरोक्त जानकारी सामुद्रिक शास्त्र के आधार पर संक्षिप्त जानकारी है। सामुद्रिक शास्त्र में किसी एक अंग को देखकर किसी के संपूर्ण व्यक्तित्व का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। अत: इसे संक्षिप्त जानकारी मानकर पाठक अपने विवेक का उपयोग करें।