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इंडिगो ने सरकार के फैसले का सम्मान करते हुए कर्मचारियों के वेतन कटौती के फरमान को वापस लिया
April 23, 2020 • Rashtra Times

नई दिल्ली. भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो (Indigo) ने गुरुवार को अपने कर्मचारियों को राहत देते हुए अप्रैल में घोषित वेतन कटौती के निर्णय को वापस ले लिया है। इंडिगो के सीईओ रोनो दत्ता ने कहा कि यह निर्णय लाॅकडाउन के दौरान कर्मचारियों का वेतन नहीं काटे जाने की सरकार की इच्छा का सम्मान करते हुए लिया गया है। दत्ता ने ई-मेल में कर्मचारियों से कहा है, 'हमारी कार्यकारी समिति के सदस्य और वरिष्ठ उपाध्यक्षों ने स्वेच्छा से इस महीने वेतन कम लेने का फैसला किया है। अन्य सभी कर्मचारी अप्रैल महीने का पूरा वेतन पाने की उम्मीद कर सकते हैं।'

कंपनी कर चुकी है वेतन कटौती का ऐलान
बता दें कि दत्ता ने 19 मार्च को घोषणा की थी कि कोरोना महामारी और लाॅकडाउन को देखते हुए एयरलाइन अपने वरिष्ठ कर्मचारियों के वेतन में कटौती करने जा रही है और वह स्वयं 25 फीसदी कम वेतन लेंगे। उन्होंने अपने ऐलान में कहा था कि, 'वह स्वयं 25 फीसदी कम वेतन लेंगे जबकि वरिष्ठ उपाध्यक्ष (एसपीवी) और उसके ऊपर के अधिकारी 20 फीसदी, उपाध्यक्ष (वीपी) और चालक दल (कॉकपिट) के सदस्य 15 फीसदी कम वेतन लेंगे। सहायक उपाध्यक्ष (एवीवी), डी बैंड के कर्मचारी और चालक दल के अन्य सदस्य (केबिन क्रू) 10 फीसदी और बैंड सी के अंतर्गत आने वाले कर्मचारी 5 फीसदी कम वेतन लेंगे।'

इंडिगो ने 1 जून से बुकिंग शुरू कर दिया है
सरकार के निर्देश के बावजूद इंडिगो समेत अन्य प्राइवेट एयरलाइन्स टिकट की बुकिंग शुरू कर दी है। देश की टॉप-6 में चार एयरलाइन मई के तीसरे हफ्ते के लिए डमेस्टिक फ्लाइट की टिकट बुक कर रही हैं। इंडिगो ने 1 जून से बुकिंग शुरू कर दिया है। ये सारी बुकिंग्स डोमेस्टिक फ्लाइट्स के लिए हैं।

एविएशन सेक्टर को रोजाना 150 करोड़ रुपए का नुकसान
कोरोनावायरस के चलते देश में एविएशन सेक्टर को रोजाना 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। देश में प्रतिदिन करीब 4000 घरेलू और 500 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन होता है। अकेले दिल्ली में ही रोजाना 900 से अधिक उड़ानों का संचालन होता है। भारतीय विमानन उद्योग को 75 से 80 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के नुकसान की आशंका है। इस वजह से रेवन्यू भी 40% गिर सकता है। डीजीसीए के एक अधिकारी का कहना है कि कोरोना संकट से पहले देश में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का एक दिन का रेवन्यृ करीब 350-400 करोड़ रुपए था, जो अब आधा रह गया है।