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इंडिगो कर्मचारियों के वेतन में मई से करेगी कटौती, जुलाई तक कुछ को बिना सैलरी के छुट्टी पर भेजेगी कंपनी
May 8, 2020 • Rashtra Times

नई दिल्ली. इंडिगो ने अप्रैल महीने के लिए वेतन कटौती के संबंध में अपनी नीति पर पीछे जाने के बाद आखिरकार अपने कर्मचारियों के लिए मई, जून और जुलाई के महीनों के लिए लीव विदाउट पे (बिना वेतन के छुट्टी ) के तहत वेतन कटौती की घोषणा की है। इंडिगो के सीईओ रोनोजॉय दत्ता ने कर्मचारियों को एक मेल लिखकर कहा है कि मई के महीने से पे-कट लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हमें मई, जून और जुलाई के लिए बिना वेतन के सीमित, श्रेणीबद्ध लीव विदाउट पे कार्यक्रम लागू करना होगा। बता दें कि कोविड-19 संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए देशभर में 25 मार्च से लॉकडाउन है। इसके चलते लोगों की आवाजाही पर पाबंदी है। विमानन उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

लीव विदाउट पे कर्मचारी के ग्रुप के आधार पर 1.5 से 5 दिनों तक होगा
ईमेल के मुताबिक दत्ता ने कहा, 'हमने मार्च और अप्रैल में कर्मचारियों का पूरा वेतन दिया। अब हमारे पास मूल रूप से घोषित वेतन कटौती को मई 2020 से लागू करने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा है।' उन्होंने आगे कहा कि लीव विदाउट पे कर्मचारी के ग्रुप के आधार पर 1.5 से 5 दिनों तक होगा। इस पूरी प्रक्रिया में हम ये ध्यान रखेंगे कि हमारे 'ए' श्रेण्री के कर्मचारियों पर कोई प्रभाव ना पड़े जो हमारे कार्यबल का सबसे बड़ा हिस्सा भी हैं। इससे पहले अप्रैल में कंपनी ने अपनी वेतन कटौती की घोषणा को मार्च में सरकार द्वारा कंपनियों को लॉकडाउन के दौरान वेतन में कटौती नहीं करने की अपील के बाद वापस ले लिया था।

लॉकडाउन की शुरुआत से ही सभी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें बंद हैं
इंडिगो के अलावा, उसके सभी समकक्ष कंपनियों जैसे स्पाइसजेट और गो-एयर ने या तो वेतन में कटौती की है या बड़ी संख्या में अपने कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी पर भेज दिया है। कोविड-19 के कारण पैदा हुए संकट के कारण एयरलाइंस को गंभीर नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं मार्च में लॉकडाउन की शुरुआत के बाद से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों उड़ान को निलंबित कर दिया गया है। दत्ता ने कहा है कि हमने मार्च और अप्रैल के महीनों के लिए सभी कर्मचारी को वेतन का भुगतान किया है, लेकिन अब मुझे लगता है कि हमारे पास मूल रूप से घोषित किए गए मई महीने से वेतन कटौती के कार्यक्रम को लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।