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दिल्ली दंगों की BBC ने की एकतरफा रिपोर्टिंग, प्रसार भारती ने ठुकराया निमंत्रण
March 6, 2020 • Rashtra Times

ब्रिटिश राष्ट्रीय प्रसारक, बीबीसी को भारत में सार्वजनिक प्रसारण की जिम्मेदारी संभाल रही प्रसार भारती ने जोर का झटका दिया है। दरअसल, प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी शशि शेखर वेम्पती ने दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों की एकतरफा रिपोर्ट का हवाला देते हुए बीबीसी के एक कार्यक्रम में भाग लेने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। वेम्पती के इस फैसले से BBC को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। बीबीसी के महानिदेशक, टोनी हॉल को लिखे एक पत्र में शशि शेखर वेम्पति ने बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ द ईयर अवार्ड्स नाइट में भाग लेने के लिए निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है। यह बीबीसी द्वारा आयोजित इस तरह का पहला पुरस्कार समारोह है। 3 मार्च, 2020 से योगिता लिमये द्वारा बीबीसी की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए, वेम्पति ने कहा कि बीबीसी ने दिल्ली पुलिस पर एकतरफा कहानियों को दिखाने के लिए कुछ दृश्यों का उपयोग किया है, लेकिन कहीं भी पुलिस कर्मियों पर जानलेवा हमले की कहानियों की रिपोर्ट करने का प्रयास नहीं किया गया है, जिसमें दिल्ली पुलिस के एक कर्मी की मृत्यु भी शामिल है। पुलिस कांस्टेबल रतन लाल और आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा, जिनकी कथित तौर पर AAP नेता ताहिर हुसैन और उनकी सर्मथक भीड़ ने हिंदू विरोधी दंगों के दौरान हत्या कर दी थी। लिमये ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दिल्ली पुलिस भारत के सभी लोगों की रक्षा करने के लिए है, "लेकिन यहाँ पुलिस को हिंदुओं के साथ मुसलमानों की ओर पत्थर फेंकते हुए देखा जा सकता है।"  लिमये ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी अमित शर्मा और कांस्टेबल रतन लाल पर हमलों के बारे में उल्लेख नहीं किया है जहां लाल ने बाद में दंगाई मुस्लिम भीड़ की चोटों के कारण दम तोड़ दिया। सामने आए एक वीडियो में मुस्लिम महिलाओं को भी दिल्ली पुलिस पर पथराव करते देखा गया था। इस कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार करते हुए प्रसार भारती के सीईओ वेम्पति ने कहा कि यह निराशाजनक था कि बीबीसी ने दिल्ली में हिंसा की घटनाओं की ऐसी एकतरफा रिर्पोटिंग की जिसने हिंसा को कम करने की बजाय उसे बढ़ाने का काम किया। वेम्पति ने बीबीसी को "राष्ट्रों की संप्रभुता का सम्मान" करने के लिए भी कहा है और इसे भारतीय प्रसारक के साथ अधिक से अधिक सार्वजनिक हित में एक साथ काम करने का आग्रह किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बीबीसी ऐसी प्रकृति की रिपोर्टों पर अपने संपादकीय विचारों की समीक्षा करेगा।