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चिकन और अंडे से भी फैलता है कोरोना, ऐसी अफवाहों से पोल्ट्री उद्योग को 24 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, 6 लाख लोग बेरोजगार
April 17, 2020 • Rashtra Times

मुंबई. कुमुद कुमार दास. नए कोरोनावायरस(कोविड-19) का पोल्ट्री उद्योग पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इस उद्योग में करीब 6 लाख लोगों का रोजगार छूट गया है और उद्योग को अब तक 24 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। वायरस संक्रमण से पहले पोल्ट्री उद्योग का बाजार 1.20 लाख करोड़ रुपए का था और इसमें 4 करोड़ लोगों को सीधे या परोक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ था। पोल्ट्री उद्योग देश की जीडीपी में 2 फीसदी का योगदान करता है। वायरस संक्रमण के प्रसार की शुरुआती अवस्था में यानी जनवरी के आखिरी सप्ताह में सोशल मीडिया पर एक अफवाह उड़ी थी कि चिकन और अंडे से भी कोरोनावायरस फैलता है। इसके कारण बड़े पैमाने पर लोगों ने चिकन और अंडे खाना छोड़ दिया और आज तक स्थिति में बदलाव नहीं हुआ है।

चिकन के उत्पादन में भारत का तीसरा और अंडे के उत्पादन में चौथा स्थान है
उद्योग को मोटे तौर पर चार मुख्य सेक्टरों में बांटा जा सकता है- ब्रीडर, लेयर (टेबल एग), ब्रॉयलर (चिकन) और फीडिंग उद्योग। खास बात यह भी है कि देश में मक्के और सोयाबीन का जितना उत्पादन होता है, उसके आधे की खपत पोल्ट्री उद्योग में ही हो जाती है। दुनियाभर में चिकन के उत्पादन में भारत का तीसरा और अंडे के उत्पादन में चौथा स्थान है। देश में हर महीने 70-80 करोड़ किलोग्राम ब्रॉयलर का उत्पादन होता है। वहीं अंडे का उत्पादन देश में रोजाना 18-20 करोड़ की संख्या में होता है।

80 रुपए के भाव बिकने वाले ब्रॉयलर को 5 रुपए की कीमत पर भी कोई पूछ नहीं रहा
रांची के नेशनल स्मॉलहोल्डर पोल्ट्री डेवलपमेंटट ट्रस्ट (एनएसपीडीटी) के मुख्य संचालन अधिकारी पंकज दास ने कहा कि वायरस संक्रमण फैलने से पहले हम 80 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से ब्रॉयलर बेचा करते थे। लेकिन वायरस का संक्रमण फैलने के बाद अब इसकी कीमत घटकर 5 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई है। इस कीमत पर भी उत्पाद नहीं बिक रहे हैं। हमें ब्रॉयलर एग और चिकन को डंप यार्ड में डंप करना पड़ रहा है। ट्र्रस्ट ने 20 लाख ब्रॉयलर्स नष्ट कर दिए, जिसकी कीमतत 10 करोड़ रुपए थी। ट्रस्ट ने 3 करोड़ रुपए के हैचिंग एग्स नष्ट कर दिए। कीमत घटने के कारण ट्रस्ट को हाल में 15 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

दो महीने में 30-40 फीसदी का नुकसान
पोल्ट्री उद्योग संघ वेट्स इन पोल्ट्री (वीआईपी) के सचिव संतोष इरे ने कहा कि अफवाहों को खत्म किया जाना जरूरी है। हम वैज्ञानिक तरीके से चिकन का विकास करते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे चिकन की डाइट एक आदमी की डाइड से ज्यादा पूर्ण होती है। इरे पुणे के पोल्ट्री फर्म भुवन न्यूट्र्रीबायो साइंसेज के निदेशक भी हैं। उन्होंने कहा कि अकेले हमारी कंपनी को पिछले दो महीने में 30-40 फीसदी का नुकसान हो चुका है। 15 फरवरी के बाद से कोई ऑर्डर नहीं मिला है। हमारी हालत इतनी खराब है कि मैं होम लोन और कार लोन की किस्त का भुगतान नहीं कर पा रहा हूं। उन्होंने बताया कि देश में चिकन की सालाना खपत प्रति व्यक्ति 3.8 किलोग्राम है, जबकि वैश्विक औसत 80-90 किलोग्राम है। अंडे की सालाना खपत भारत में 71 यूनिट है, जबकि वैश्विक औसत 180 यूनिट है।

परिवहन संबंधी मुद्दों और चिकन फीड्स की अनुपलब्धता से किसानों की समस्या और बढ़ी
महाराष्ट्र पोल्ट्री फार्मर्स एंड ब्रीडर्स एसोसिएशन के सचिव प्रसन्न पेडगांवकर ने कहा कि 31 जनवरी तक उत्पादन का स्तर सामान्य था। चिकन से कोरोनावायरस का संक्रमण होने की अफवाह फैलने के बाद स्थिति खराब हो गई। इसके कारण चिकन फार्मर 5 रुपए तक की सस्ती कीमत पर चिकन बेचने लगे। लेकिन अफवाह के कारण इस कीमत पर भी खरीदार नहीं मिल रहे थे। परिवहन संबंधी मुद्दों और चिकन फीड्स की उपलब्धता नहीं होने से किसानों की समस्या और बढ़ गई। अब स्थिति यह है कि अपने कारोबार को फिर से खड़ा करने के लिए किसानों को 28-30 जार करोड़ रुपए का पैकेज चाहिए। हमने सरकार से कामकाजी पूंजी जारी करने का अनुरोध किया है।

फीड्स नहीं मिल पाने से चिकन मरने लगे
सगुन फूड्स के वाइस प्रेसिडेंट मानवेंद्र दत्त ने कहा कि लॉकडाउन से पहले ही अफवाह के कारण चिकन उत्पादों की खपत घट गई थी। कोयंबटूर (तमिलनाडु) की कंपनी सगुन फूड्स का देश के पोल्ट्री बाजार पर 18 फीसदी कब्जा है। ब्रॉयलर उत्पादन के मामले में यह बाजार की अग्रणी कंपनी है। उन्होंने कहा कि चिकनन की कीमत 100 रुपए प्रति किलोग्राम से घटकर 5 रुपए पर आ गई। हमें भारी नुकसान हुआ। फिर भी हम काम करते रहे। लेकिन परिवहन सेवा बंद होने से फीड्स नहीं मिल पाने के कारण हमारे चिकन मरने लगे। हर चिकन को हर रोज 150 ग्राम फीड्स की जरूरत होती है। इसलिए कुछ बड़ी पोल्ट्री कंपनियों सगुन फूड्स, श्रीनिवासा, आईबी ग्रुप और वेंकीज के प्रमुखों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। बुधवार को आए नए दिशानिर्देश के बारे में उन्होंने कहा कि यह अच्छा कदम है। इससे हमें अपनी क्षमता के 20-30 फीसदी तक कारोबार करने में मदद मिलेगी। इसका कारण यह है कि सरकार ने चिकन फीड्स की आपूर्ति को अनुमति दे दी है।