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55 प्रवासी मजदूर पकड़े जाने के डर से खेतों में छिपे, पुलिस की गाड़ियां देखकर भागने लगे, मिला सहारा  
May 12, 2020 • Rashtra Times

सादुलशहर लॉकडाउन के दौर में मजदूर अपने घरों की ओर किसी भी हाल में लौट रहे हैं। सादुलशहर क्षेत्र में सोमवार शाम को 55 श्रमिक खेतों में भटकते मिले। इनमें पुरुष, महिलाएं, बच्चे हैं। इन्हें ट्रैक्टर-ट्रालियों से सादुलशहर के राधा स्वामी सत्संग भवन में लाया गया। यहां सभी को पानी, चाय-नाश्ता एवं भोजन करवाया गया। यही नहीं, अधिक गर्मी को देखते हुए आराम के लिए गद्दे, हवा के लिए कूलर लगवाए गए।

किसी ने तहसील प्रशासन को सूचना दी कि सादुलशहर क्षेत्र के गांव बुधसिंहवाला, खैरुवाला की रोही में कई श्रमिक परिवार सिर पर सामान की गठरियां, गोद में बच्चे उठाए भटक रहे हैं। बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलते ही तहसीलदार हरीश कुमार टांक बुधसिंहवाला की रोही में पहुंचे। सरकारी गाड़ी एवं पुलिसकर्मियों को देख मजदूरों में भगदड़ मच गई, परंतु तहसीलदार ने गाड़ी में लगे स्पीकर से सभी को समझा कर रुकवाया। भूखे-प्यासे एवं बच्चों के हालात देख मौके पर ही ठंडा पानी मंगवाकर सभी को पिलाया। तहसीलदार टांक ने बताया कि सभी 55 लोगों को राधा स्वामी सत्संग भवन ले जाया गया।

नाम-पते दर्ज कर स्वास्थ्य परीक्षण करवाया
इनमें 40 लोग जैसलमेर के मोहनगढ़ क्षेत्र से आए हैं, जो पंजाब के कपूरथला एवं जालंधर क्षेत्र के हैं। वहां चने की फसल की कटाई के बाद लॉकडाउन में फंस गए थे। परिवार सहित दस दिन पूर्व मोहनगढ़ से जालंधर के लिए पैदल ही निकल पड़े थे। वहीं, 15 लोग दस दिन पूर्व भीलवाड़ा से जम्मू जाने के लिए जत्थे के रूप में पैदल रवाना हुए थे।

भीलवाड़ा में कंपनी वालों ने मजदूरी देकर घर जाने को कह दिया
भीलवाड़ा से जम्मू के लिए पैदल चले डिंपल कुमार, अजीत सिंह, नीलम सिंह, अशोक सिंह आदि ने बताया कि वे तीन माह पूर्व फैक्ट्रियों में रुई की गांठों का लोडिंग-अनलोडिंग का कार्य करने के लिए भीलवाड़ा गए थे। इस दौरान यह बीमारी आ गई। कंपनी वालों ने मजदूरी देकर घर जाने को कह दिया। न कोई साधन मिला, न ही कोई इजाजत। परेशान होकर पैदल ही निकल पड़े। कई स्थानों पर रास्ता पूछा, किसी ने सही बताया तो किसी ने गलत। भटकते-भटकते सादुलशहर पहुंचे। यहां खाना खाया और आराम किया है। जो सहारा यहां मिला है, उसको हम जिंदगी में कभी नहीं भूल सकते।

जैसलमेर के मोहनगढ़ से 40 लोग पैदल जम्मू के लिए रवाना हुए 
जैसलमेर के मोहनगढ़ क्षेत्र से आए जयपाल एवं मोहनलाल ने बताया कि 40 लोगों का जत्था दस दिन पूर्व पैदल ही रवाना हुआ। यहां से अनूपगढ़, सूरतगढ़, हनुमानगढ़ से होते सादुलशहर आ रहे थे। बीच रास्ते में किसी ने कह दिया कि आगे पुलिस खड़ी है। इस पर वे डर की वजह से खेतों की ओर निकल गए। महिलाओं और बच्चों ने रोना शुरू कर दिया। पैरों में छाले पड़ गए, पैर सूज गए, घाव हो गए। इन्होंने बताया कि मोहनगढ़ में कपूरथला एवं जालंधर क्षेत्र में जाने के लिए पास बनाने की प्रार्थना की गई, लेकिन वहां कहा गया कि पंजाब में जिसको वोट दिए हैं वे ही पास बनवाकर देंगे।

इन्होंने बेसहारा मजदूरों को दिया सहारा

इन श्रमिकों को सत्संग भवन लाने और भोजन आदि की व्यवस्था में तहसीलदार हरीश कुमार टांक, राजस्व निरीक्षक बृजमोहन बजाज, पटवार संघ के जिला अध्यक्ष दिनेश यादव, पटवारी रमेश यादव, शैलेंद्र कुमार, संदीप कुमार, अशोक विश्नोई, राधा स्वामी डेरे के राजेश खुंगर, गुलशन छाबड़ा, कश्मीरीलाल, विपिन बग्गा, सुरेश कुमार, ठेकेदार जसवंत मिड्ढ़ा, चिराग कंधारी, पुलिसकर्मी अनुराधा के अलावा एबीसी ईंट उद्योग प्रबंधन का सराहनीय सहयोग रहा।