ALL राजनीति मनोरंजन तकनीकी खेल कारोबार धार्मिक अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्रीय ई पेपर पीआर न्यूजवायर
2020 में भगवान कृष्ण होते तो महिलाओं के लिए क्या करते?
December 20, 2019 • Rashtra Times

भगवान श्रीकृष्ण का महिलाओं के प्रति विशेष अनुराग था और महिलाएं भी उनके प्रति विशेष अनुराग रखती थीं। इसके पीछे कई कारण हैं। पहला यह कि वे महिलाओं की संवेदना और उनकी भावनाओं को समझते थे, दूसरा यह कि वे उनका विशेष सम्मान करते थे, तीसरा यह कि वे उनकी रक्षा के लिए हर समय तत्पर रहते थे।

उल्लेखनीय है कि श्रीकृष्ण की रासलीला वाली बातें मनघड़ंत है। माना जाता है कि मध्यकाल के भक्तिकाल में राधा और कृष्ण की प्रेमकथाओं और गोपियों के साथ उनकी रासलीलाओं को विस्तार मिला। उनकी रासलीलाओं की पृष्‍ठभूमि वृंदावन है जहां उन्होंने रासलीला की थी लेकिन श्रीकृष्‍ण ने मात्र 11 वर्ष की उम्र में ही वृंदावन छोड़ दिया था। खैर... हम बात कर रहे हैं कि श्रीकृष्ण ने कैसे किस तरह महिलाओं के सम्मान और उनकी इज्जत की रक्षा की थी।

दरअसल, भगवान श्रीकृष्ण का धर्म महिलाओं का ही धर्म है। श्रीकृष्ण के माध्यम से हजारों महिलाओं के मोक्ष को पाया था। श्रीकृष्ण की महिलाओं ने जीवन भर सहायता की और श्रीकृष्ण ने भी उनकी सहायता की थी।

कृष्ण की पत्नियां रुक्मिणी, जाम्बवंती, सत्यभामा, मित्रवंदा, सत्या, लक्ष्मणा, भद्रा और कालिंदी थीं। श्रीकृष्ण की 8 सखियां राधा, ललिता आदि सहित कृष्ण की 8 सखियां थीं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार इनके नाम इस तरह हैं- चन्द्रावली, श्यामा, शैव्या, पद्या, राधा, ललिता, विशाखा तथा भद्रा। कहते हैं कि ललिता को मोक्ष नहीं मिल पाया था तो उन्होंने मीरा के रूप में जन्म लेकर यह ज्ञान प्राप्त कर लिया था।

कृष्ण की 3 बहनें थी- 1. एकानंगा (यह यशोदा की पुत्री थीं), सुभद्रा (रोहिणी की पुत्री) और महामाया (देवकी की पुत्री और श्रीकृष्ण की सगी बहन) जिन्हें विंध्यवासीनी भी कहा जाता है। महामाया ने श्रीकृष्ण का हर कदम पर साथ दिया था। द्रौपदी उनकी मानस भगिनी थी।

1.द्रौपदी के सम्मान की रक्षा : भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी अच्छे मित्र थे। द्रौपदी उन्हें सखा तो कृष्ण उन्हें सखी मानते थे। कृष्ण ने द्रौपदी के हर संकट में साथ देकर अपनी दोस्ती का कर्तव्य निभाया था। एक अन्य कथा के अनुसार जब श्रीकृष्ण द्वारा सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया गया, उस समय श्रीकृष्ण की अंगुली भी कट गई थी। अंगुली कटने पर श्रीकृष्ण का रक्त बहने लगा। तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर श्रीकृष्ण की अंगुली पर बांधी थी।

इस कर्म के बदले श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को आशीर्वाद देकर कहा था कि एक दिन मैं अवश्य तुम्हारी साड़ी की कीमत अदा करूंगा। इन कर्मों की वजह से श्रीकृष्ण ने द्रौपदी के चीरहरण के समय उनकी साड़ी को इस पुण्य के बदले ब्याज सहित इतना बढ़ाकर लौटा दिया और उनकी लाज बच गई। द्रौपदी का मूल नाम कृष्णा था।

2. भौमासुर से 16 हजार महिलाओं को मुक्त काया : कृष्ण अपनी आठों पत्नियों के साथ सुखपूर्वक द्वारिका में रह रहे थे, लेकिन त‍भी उन्हें इंद्र के द्वारा अत्याचारी भौमासुर (नरकासुर) के बारे में पता चला जिसने अदिति के कुंडल और देवताओं से मणि छीन कर लगभग 1600 हजार महिलाओं को बंधक बना लिया था, जिसमें से कई राजकन्याएं और कई विवाहिताएं थीं। श्रीकृष्‍ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ भौमासुर से भयंकर युद्ध लड़कर उन 16 हजार महिलाओं को मुक्त कराया था।

सामाजिक मान्यताओं के चलते भौमासुर द्वारा बंधक बनकर रखी गई इन नारियों को कोई भी अपनाने को तैयार नहीं था, तब अंत में श्रीकृष्ण ने सभी को आश्रय दिया। ऐसी स्थिति में उन सभी कन्याओं ने श्रीकृष्ण को ही अपना सबकुछ मानते हुए उन्हें पति रूप में स्वीकार किया, लेकिन श्रीकृष्ण उन्हें इस तरह नहीं मानते थे। उन सभी को श्रीकृष्ण अपने साथ द्वारिकापुरी ले आए। वहां वे सभी कन्याएं स्वतंत्रपूर्वक अपनी इच्छानुसार सम्मानपूर्वक द्वारका में रहती थीं। वे सभी वहां भजन, कीर्तन, ईश्वर भक्ति आदि करके सुखपूर्वक रहती थीं। द्वारका एक भव्य नगर था जहां सभी समाज और वर्ग के लोग रहते थे।