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 बैन को लेकर पृथ्वी शॉ ने कहा-मेरे लिए खेल से दूर रहना टॉर्चर से कम नहीं था, आलोचकों को बल्ले से जवाब देना चाहता हूं
April 9, 2020 • Rashtra Times

 भारत के सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू अपने ऊपर लगे 8 महीने के बैन को लेकर कहा कि खेल से दूर रहना मेरे लिए किसी टॉर्चर से कम नहीं था। ऐसा किसी और के साथ नहीं होना चाहिए। शॉ ने कहा कि आप क्या दवा खा रहे हैं, इसे लेकर बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। मेरे मामले में ही देखें, मैंने कफ सिरप ली थी, मुझे यह नहीं पता था कि इसमें प्रतिबंधित पदार्थ है। मैंने अपनी गलती से सीखा और इसे फिर कभी नहीं दोहराऊंगा। वहीं, उन्होंने आलोचकों के लिए कहा कि मैं सबको खुश नहीं रख सकता। बस बल्ले से जवाब देना चाहता हूं। 
उन्होंने डोपिंग को लेकर कहा कि मैं अब कोई भी दवा खाने से पहले बीसीसीआई के डॉक्टर से बात करता हूं। ताकि यह पता रहे कि जो दवाई खा रहा हूं उसमें कोई प्रतिबंधित पदार्थ तो नहीं। इस बल्लेबाज पर पिछले साल जुलाई में डोपिंग के कारण 8 महीने का बैन लगा था। उन्होंने इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड दौरे से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की। उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 2 टेस्ट की 4 पारियों में सिर्फ 98 रन बनाए थे। इस दौरान वे 1 बार ही 50 रन का आंकड़ा पार कर पाए। वनडे में भी उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। शॉ ने 3 वनडे में 84 रन बनाए थे। 

शॉ ने कहा- मुश्किल वक्त में परिवार दोस्तों से मिली मदद का शुक्रगुजार

इस इंटरव्यू में इस सलामी बल्लेबाज ने करियर की शुरुआत में मिली सफलता के खुद पर हावी होने से जु़ड़े सवाल पर कहा कि हां अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतना और टेस्ट डेब्यू में शतक लगाना मेरे लिए बड़ी बात थी। लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह मेरे ऊपर हावी हो गए थे। डोपिंग बैन जैसी चीजें मेरे नियंत्रण में थी, लेकिन चोटिल होना (2018 में एड़ी में लगी चोट) मेरे हाथ में नहीं था। अपने आलोचकों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा- मैंने महसूस किया कि आप सभी को खुश नहीं रख सकते। हालांकि, मैं जनता हूं कि आलोचक भी जिंदगी का हिस्सा होते हैं। मैं उन्हें सकारात्मक रुप से लेकर खुद में सुधार की कोशिश करता हूं। बीता साल उतना अच्छा नहीं था। मैं हर चीज का जवाब अपने बल्ले से देना चाहता हूं। मुश्किल वक्त में आदमी की असली परीक्षा होती है। मैं इस बात का शुक्रगुजार हूं कि मेरे पास पिता, करीबी दोस्त और मैनेजमेंट एजेंसी है, जो कठिन समय में मेरे साथ खड़ी थी।